✎ रुटैग 2.0 ग्रामीण तकनीकी समाधानों को सत्यापित, व्यावसायीकरण एवं विस्तारित कर ग्रामीण विकास को गति दे रहा है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने 24-25 सितंबर 2026 को आईआईटी रुड़की में आयोजित रुटैग 2.0 परियोजनाओं की तीसरी वार्षिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्रवाई समूह (रुटैग) के सभी सात केंद्रों के हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की, आईसीएआर-नार्म हैदराबाद तथा स्कुआस्ट-कश्मीर शामिल हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य रुटैग 2.0 के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी हस्तक्षेपों को और प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श करना था। प्रो. सूद ने इस बात पर बल दिया कि तकनीक आधारित समाधान किफायती होने के साथ-साथ गुणवत्ता, विश्वसनीयता और टिकाऊपन से समझौता किए बिना ग्रामीण समुदायों की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करें। उन्होंने तकनीकी नवाचारों के व्यावसायीकरण और उद्योग द्वारा अपनाए जाने पर भी जोर दिया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके। इस बैठक के माध्यम से सरकार ने ग्रामीण विकास से जुड़े तकनीकी अनुसंधानों को व्यावहारिक रूप देने तथा उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
यह पहल बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक है। रुटैग जैसी सरकारी पहलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता तथा स्थायी विकास जैसे मुद्दे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जो वर्तमान में सरकार की प्रमुख नीतियों जैसे ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ का हिस्सा हैं। बैंकिंग क्षेत्र में ग्रामीण विकास के लिए ऋण वितरण, तकनीकी नवाचार के लिए फंडिंग तथा ग्रामीण स्टार्टअप्स को
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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