✎ आरबीआई द्वारा ओवरनाइट वीआरआरआर नीलामी तरलता प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें 1,25,000 करोड़ रुपये की राशि 1 दिन के लिए ली जाएगी।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
आरबीआई २४ सितंबर २०२६ को तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत ओवरनाइट परिवर्ती दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी आयोजित करेगा। यह निर्णय वर्तमान और विकसित होती तरलता स्थितियों के आकलन के आधार पर लिया गया है। नीलामी में अधिसूचित राशि १,२५,००० करोड़ रुपये होगी तथा इसका कार्यकाल एक दिन का होगा। विंडो समय सुबह ९:३० बजे से १०:०० बजे तक होगा तथा पुनर्भुगतान तिथि २५ सितंबर २०२६ होगी। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में तरलता को नियंत्रित करने तथा ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी तथा एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मौद्रिक नीति, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर तथा एलएएफ जैसे प्रमुख अवधारणाओं की समझ बढ़ती है। इन परीक्षाओं में अक्सर मौद्रिक नीति के उपकरणों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इस घटना का अध्ययन करना लाभकारी होगा।
यह घटना बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन तथा मौद्रिक नीति के प्रभावों को समझने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। आरबीआई द्वारा आयोजित वीआरआरआर नीलामी से बैंकों को अल्पकालिक तरलता की उपलब्धता सुनिश्चित होती है तथा ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहती है। एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में मौद्रिक नीति के विभिन्न पहलुओं जैसे रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, एमएसएफ तथा सीआरआर पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए, इस घटना का अध्ययन करने से परीक्षार्थियों को मौद्रिक नीति के तंत्र तथा इसके प्रभावों को समझने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह जानकारी बैंकिंग प्रणाली में तरलता के प्रवाह तथा इसके नियंत्रण के तरीकों को समझने में भी मददगार साबित होगी।
स्रोत: RBI
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