✎ कदमब्रयार नदी प्रदूषण नियंत्रण के लिए KSPCB को NGT के निर्देशों का पालन करना होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) द्वारा प्रस्तुत कदम्बरयार नदी प्रदूषण को रोकने के उपायों पर ‘अपूर्ण’ रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायणन और विशेषज्ञ सदस्य प्रशांत गर्गवा की अध्यक्षता वाली दक्षिणी पीठ ने कहा कि बोर्ड की रिपोर्ट में निर्धारित विवरणों का अभाव है और यह अधिकरण के पूर्व निर्देशों का पालन नहीं करती। बोर्ड से अपेक्षा की गई थी कि वह प्रदूषकों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन करे, किंतु रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं था। पीठ ने बोर्ड को रिपोर्ट में सुधार कर 11 सितंबर, 2026 तक पुनः प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला तब सामने आया जब ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट ‘नो रेस्पाइट फ्रॉम फेकल कंटेमिनेशन इन कदम्बरयार रिवर इन एर्नाकुलम डिस्ट्रिक्ट’ के आधार पर एनजीटी ने हस्तक्षेप किया था। कदम्बरयार नदी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2025 में प्रकाशित ‘प्रदूषित नदी खंडों के पुनर्स्थापन हेतु’ सूची में शामिल 32 प्रदूषित नदी खंडों में रखा गया है।
इस मामले की प्रासंगिकता बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति एवं ‘पॉल्यूटर पे’ सिद्धांत जैसे मुद्दे शासन व्यवस्था एवं अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आते हैं, जिनसे संबंधित प्रश्न इन परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसे संस्थानों की भूमिका, उनकी शक्तियाँ एवं कार्यप्रणाली भी परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक हैं। केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कमी पाए जाने का मामला शासन की जवाबदेही एवं पारदर्शिता को भी रेखांकित करता है, जो प्रशासनिक सुधारों एवं नीति निर्माण के
स्रोत: The Hindu
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