NCERT textbooksCBSE curriculumParliamentary panelNational Education PolicyNational Curriculum Framework✎ NCERT पाठ्यपुस्तक विलंब एवं अनुप्रयोग आधारित परीक्षा से पाठ्यक्रम अंतराल बढ़ रहा है, जिसके लिए त्वरित उपाय आवश्यक हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
नए पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के बीच बढ़ता अंतर, विशेष रूप से एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के विलंब और एप्लीकेशन-आधारित बोर्ड परीक्षाओं के कारण, संसदीय पैनल ने शिक्षा प्रणाली में एक बड़ी खाई की ओर ध्यान आकर्षित किया है। यह अंतर कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों, खासकर कक्षा 10 और 12 की परीक्षा देने वालों के लिए शैक्षणिक तनाव और भ्रम का कारण बन रहा है। पैनल ने बताया कि सीबीएसई ने पाठ्यक्रम को एनईपी 2020 और एनसीएफ 2023 के अनुरूप ढाला है, लेकिन एनसीईआरटी द्वारा नई पाठ्यपुस्तकों के विलंब के कारण स्कूलों को पुराने अध्ययन सामग्री पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे पाठ्यक्रम में एक बड़ा अंतर उत्पन्न हो रहा है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इन परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी एनईपी 2020 के सिद्धांतों का प्रभाव देखा जा रहा है।
पैनल ने शिक्षकों के प्रशिक्षण और सीबीएसई की डिजिटल प्रणाली में सुधार की भी सिफारिश की है, जिससे नई शिक्षण पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। शिक्षकों के ऑनलाइन प्रशिक्षण में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण शुल्क जैसी समस्याओं पर भी पैनल ने चिंता जताई है। यह अंतर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार होने वाले उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनके मूलभूत ज्ञान और विश्लेषणात्मक कौशल पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, सीबीएसई द्वारा परीक्षा शुल्क में रियायतों की कमी और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे भी उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
स्रोत: The Indian Express
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