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एमपी: बलात्कार केस में 10 साल की सजा पाए आरोपी को हाईकोर्ट ने किया दोषमुक्त, डीएनए रिपोर्ट बनी अहम आधार — labelled illustration

✎ डीएनए सबूत बलात्कार मामलों में अपराध साबित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक बलात्कार मामले में जिला न्यायालय द्वारा 10 साल की सजा सुनाए गए आरोपी तीरथ उर्फ छोटू टेकाम को हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। पीड़िता से जन्मे बच्चे का डीएनए आरोपी के डीएनए से मेल नहीं खाने के कारण अदालत ने तकनीकी साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया। मामले में आरोपी को जिला न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था, लेकिन हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए डीएनए रिपोर्ट को प्रमुख आधार मानते हुए आरोपी को निर्दोष करार दिया।

यह घटना न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषकर डीएनए तकनीक की भूमिका को रेखांकित करती है, जो आपराधिक मामलों में निर्णायक साबित होती है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे प्रशासनिक न्याय, कानूनी प्रक्रिया और तकनीकी साक्ष्यों के महत्व को समझा जा सकता है। साथ ही, न्यायिक सुधारों और कानूनी जागरूकता के संदर्भ में भी यह घटना प्रासंगिक है, जो शासन व्यवस्था और कानून प्रवर्तन के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी होती है।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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