✎ न्यायपालिका में उत्थान के लिए कठिन परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे को ९ सितंबर, २०२६ को कलकत्ता उच्च न्यायालय के ४५वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता शिक्षक थे और उन्हें कोई कानूनी पृष्ठभूमि नहीं थी। न्यायमूर्ति घुगे ने अपने संघर्षमय सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कॉलेज जाने के लिए प्रतिदिन ४ किलोमीटर साइकिल चलाई थी और शुरुआती दिनों में अपने अभ्यास के दौरान सात साल तक मोटरसाइकिल पर निर्भर रहे। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से वे इस मुकाम तक पहुँचे हैं, जहाँ न्यायपालिका में उच्चतम सम्मान मिला है। उन्होंने अपने परिवार, विशेषकर पत्नी वर्षा और माता-पिता के बलिदानों को भी रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति घुगे ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न्यायालय सदैव न्याय के प्रति निडर और निष्पक्ष रहा है। उन्होंने न्यायपालिका में तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि आम नागरिकों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है। उनके विचार न केवल कानूनी पेशे में आने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक हैं, बल्कि वे सरकारी परीक्षाओं जैसे बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जहाँ न्यायपालिका की भूमिका, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक पारदर्शिता से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। उनके उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि कठिनाईयों के बावजूद निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है, जो परीक्षा में सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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