✎ किसान क्रेडिट कार्ड योजना से कृषि क्षेत्र में निवेश का 2.30 गुणा मूल्यवर्धन होता है तथा किसानों की आय विविधीकरण और फसल सघनता में वृद्धि हुई है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन से एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि इस योजना के अंतर्गत निवेश किया गया प्रत्येक एक रुपया कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में शुद्ध मूल्यवर्धन में 2.30 रुपये का योगदान देता है। यह आँकड़ा आईएसईसी, बेंगलुरु द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह योजना न केवल किसानों को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने में सहायक है, बल्कि कृषि उत्पादकता और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर रही है। इसके अतिरिक्त, इस योजना ने फसल सघनता और बहु-मौसमी खेती को बढ़ावा दिया है, जिससे किसान बड़े क्षेत्रों में खेती कर रहे हैं और विभिन्न मौसमों में विविध फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। सरकार द्वारा इस योजना के तहत अनुमानित सब्सिडी राशि 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है, जिसने किसानों पर ब्याज के बोझ को काफी हद तक कम किया है।
इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तक संस्थागत ऋण की पहुँच सुनिश्चित की गई है, जिससे उनकी कार्यशील पूँजी की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है। सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज को बढ़ाने और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई तकनीकी पहल शुरू की हैं, जैसे किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-केसीसी, और कृषिका। इसके अलावा, बिना गारंटी के ऋण सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है, जो 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी है। यह योजना न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि कर रही है, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित कर रही है, जिससे किसानों की आय में विविधता आ रही है। इस प्रकार, यह योजना कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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