✎ कुसुमपुर पहाड़ी में छात्रा की पहल से महिलाओं का जल बोझ घटा और सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित हुई।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
नई दिल्ली के कुसुमपुर पहाड़ी की बस्ती में वर्षों से महिलाओं और लड़कियों को टैंकर से मिलने वाले पानी को स्टोर करने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने का बोझ उठाना पड़ रहा था। इससे न केवल उनके दैनिक जीवन में कठिनाई बढ़ रही थी, बल्कि दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही थीं। इसी चुनौती को देखते हुए एक स्कूली छात्रा देविका राज बत्रा ने ‘प्रोजेक्ट अमृत’ की शुरुआत की, जिसके तहत उन्होंने एक कॉम्पैक्ट सबमर्सिबल यूवी-सी एलईडी स्टरलाइजेशन यूनिट विकसित की। यह उपकरण पानी के कंटेनरों और टंकियों में लगाया जाता है, जिससे पानी में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट किया जा सके। इस पहल से न केवल पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि बस्ती के 70 युवा स्वयंसेवकों को ‘अमृत एम्बेसडर’ के रूप में प्रशिक्षित कर समुदाय को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है। इस मॉडल का उद्देश्य केवल साफ पानी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को इसकी जिम्मेदारी में भागीदार बनाना भी है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो सके।
यह घटना राजनीति एवं शासन व्यवस्था से संबंधित नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करती है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर आधारित योजनाओं का अध्ययन अक्सर किया जाता है, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में सरकारी नीतियों, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और नवाचार आधारित समाधानों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इस प्रकार की पहलों से यह स्पष्ट होता है कि कैसे सामुदायिक स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास बड़े परिवर्तन ला सकते हैं, जो सरकारी नीतियों और योजनाओं के निर्माण में भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
स्रोत: amarujala.com
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