प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
केंद्र सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना के अंतर्गत कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। यह योजना 1993-94 से लागू है और इसके पाँच प्रमुख घटकों में न्यायालय कक्ष, न्यायिक अधिकारियों के आवास, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर तथा डिजिटल कंप्यूटर कक्ष शामिल हैं। 31 मई 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में स्वीकृत 1398 न्यायालय कक्षों में से 1278 उपलब्ध हैं, जबकि न्यायिक अधिकारियों के लिए 1199 आवासीय इकाइयों में से 1199 उपलब्ध हैं। इसी प्रकार, हिमाचल प्रदेश में स्वीकृत 192 न्यायालय कक्षों में से 180 उपलब्ध हैं तथा 161 आवासीय इकाइयों में से 161 उपलब्ध हैं। पिछले पाँच वर्षों में कर्नाटक को 349.18 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश को 31.87 करोड़ रुपये की केंद्रीय धनराशि जारी की गई है, जिससे न्यायालय भवनों और आवासीय इकाइयों का निर्माण एवं विकास किया जा रहा है।
इस पहल का महत्व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है। न्यायिक अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण से न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार होता है, जिससे न्याय तक पहुँच सुगम बनती है। इसके अतिरिक्त, यह योजना केंद्र सरकार की विकासात्मक पहलों का हिस्सा है, जो सरकारी योजनाओं और बजट आवंटन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तहत डिजिटल अवसंरचना के विकास से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है, जो तकनीकी पहलुओं पर आधारित प्रश्नों के लिए भी उपयोगी है। इस प्रकार, यह विषय न केवल राजनीति एवं शासन के अध्यायों के लिए बल्कि सामान्य जागरूकता और सरकारी नीतियों के विश्लेषण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

