✎ केरल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट और उनके कारणों का अध्ययन करें तथा वन्य जीव संरक्षण के उपायों पर ध्यान दें।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
हाल ही में वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट ‘एचईसी इन द स्टेट ऑफ केरलम 2008-2025, ट्रेंड्स, चैलेंजेस एंड इनसाइट्स’ में केरल के छह गांव—कनन देवन हिल्स, कुतम्पुझा, चित्तर, मंकुलम, पadavayal और पीची—को हाथी मृत्यु और मानव हताहतों के लगातार हॉटस्पॉट्स के रूप में चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 214 गांवों से मानव मृत्यु और चोट के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 21 गांव उच्च संघर्ष वाले क्षेत्र (20 से अधिक घटनाएं) रहे। रानी (169 मामले) सबसे अधिक प्रभावित वन विभाग रहा, जिसके बाद मुन्नार (144), मुन्नार वाइल्डलाइफ और नीलांबुर नॉर्थ (क्रमशः 138 और 108) का स्थान रहा। मानव मृत्यु के मामलों में नीलांबुर साउथ (78), पालक्काड (57) और मंकुलम (57) शीर्ष पर रहे, जबकि मानव चोटों में कोठमंगलम (164), मरयूर (102) और नीलांबुर नॉर्थ (63) अग्रणी रहे। कुल मिलाकर, राज्य में 1,781 मानव-हाथी संघर्ष (एचईसी) के मामले सामने आए, जिनमें 581 मानव मृत्यु और 1,200 चोटें शामिल थीं।
रिपोर्ट में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख कारणों में बिजली का करंट (154 हाथी मृत्यु), विस्फोटक जाल (12), प्रतिशोधात्मक हत्याएं (11), विष (5), शिकार (7) और फंदे/जाल (4) शामिल हैं। एकाकी नर हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने और संपत्ति क्षति के मामले सबसे अधिक रहे। संघर्ष वाले हाथियों के स्थानांतरण (ट्रांसलोकेशन) को अल्पकालिक समाधान बताया गया, जैसा कि 2023 में चिन्नक्कनल के एरिकोंबन के मामले में देखा गया, जब उसे रिहा करने के बाद मानव बस्तियों में प्रवेश कर गया। यह मुद्दा बैंकिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्व
स्रोत: The Hindu
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