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32 साल में 36 करोड़ खर्च, फिर भी खेत प्यासे: गंगा पंप नहर योजना ट्रायल में ही फेल; अब नए निर्माण की मांग — labelled illustration

✎ गंगा पंप नहर योजना 32 साल बाद भी विफल रही, किसानों को सिंचाई सुविधा नहीं मिली, अब नया निर्माण आवश्यक है।

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**नोट:**

बिहार के मुंगेर जिले के हैवतगंज में 1994 में शुरू हुई गंगा पंप नहर योजना पर अब तक 36.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन 32 साल बाद भी किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच सका। इसका मुख्य कारण निर्माण में तकनीकी खामियां बताई जा रही हैं, जैसे जमीन की पर्याप्त खुदाई न होना और कंक्रीट का सही इस्तेमाल न किया जाना। 2018 में मरम्मत के बाद भी ट्रायल में ही नहर में रिसाव और टूटने की समस्या सामने आई, जिसके बाद 2022 में दोबारा टेस्टिंग में पानी केवल हुसैना गांव तक पहुंचा, लेकिन फिर रिसाव शुरू हो गया। अब किसान और स्थानीय नेता नए सिरे से निर्माण की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने नवंबर-दिसंबर में इस पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया है।

यह मामला प्रशासनिक विफलता और संसाधनों के अपव्यय का उदाहरण है, जो सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठाता है। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय प्रशासनिक सुधार, राजकोषीय उत्तरदायित्व और सार्वजनिक नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में सहायक है। इसके अलावा, सरकारी खर्च के प्रभावी उपयोग और किसानों की समस्याओं के तकनीकी समाधान पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

स्रोत: amarujala.com


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