✎ परिसीमन बिल 2026 दक्षिण राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगा, डीएमके विधेयक के मसौदे के बाद अपना रुख तय करेगी।
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डीएमके ने परिसीमन बिल पर अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह संसद में बिल आने के बाद ही अपनी रणनीति तय करेगी। डीएमके नेता आरएस भारती ने कहा है कि विधेयक का आधिकारिक मसौदा आने के बाद ही पार्टी अपने पुराने सुझावों की समीक्षा करेगी और उसके बाद ही अपना राजनीतिक फैसला लेगी। उन्होंने जोर दिया कि बिना बिल के पूरे मसौदे को पढ़े कोई निर्णय लेना जल्दबाजी होगी। डीएमके ने पिछली बार परिसीमन पर केंद्र सरकार को अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी सौंपे थे, जिन पर अब नए बिल में विचार किया जाएगा या नहीं, यह भी पार्टी देखेगी।
इस परिसीमन बिल के माध्यम से लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से दक्षिणी राज्यों की आनुपातिक हिस्सेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन डीएमके सहित दक्षिण की कई पार्टियों को इस बात का डर है कि आबादी के आधार पर परिसीमन से उनके राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होने का प्रस्ताव है, जिससे राज्य की संसदीय हिस्सेदारी 7.2% पर स्थिर रहेगी। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य विधानसभाओं और लोकसभा दोनों में प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।
स्रोत: amarujala.com
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