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नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: International Relations

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026’ का उद्घाटन किया, जो अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा और ‘हरित हाइड्रोजन’ पर चौथे सम्मेलन के साथ हो रहा है। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के बीच सीधे संबंध पर जोर देते हुए कहा कि जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था में बाधा डाल सकती है, जबकि स्वच्छ ऊर्जा असीमित और हर जगह उपलब्ध है। उन्होंने स्टार्टअप्स, आईआईटीएस, नवोन्मेषकों और उद्यमियों से ऐसे सौर मॉडल विकसित करने का आग्रह किया जो चौबीसों घंटे और हर मौसम में काम कर सकें, जिससे घरों की अधिकांश ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी हो सकें और मध्यम वर्गीय परिवारों को हजारों रुपये की बचत हो सके। केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा की सराहना करते हुए बताया कि सितंबर 2024 में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 200 गीगावाट से बढ़कर अब 310 गीगावाट तक पहुँच गई है, और पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश और 6.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है।

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बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह जानकारी अत्यंत प्रासंगिक है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध के तहत, यह नोट भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति, जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आर्थिक दृष्टिकोण से, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश (67 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (6.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) भारत की आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो बैंकिंग क्षेत्र के लिए ऋण और निवेश के अवसरों को उजागर करते हैं। ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ और ‘हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III’ जैसी सरकारी योजनाएं, उनके परिव्यय और लक्ष्य, सरकारी नीतियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन की कम लागत, साथ ही भारत की हरित हाइड्रोजन खरीद प्रतिबद्धताओं में अग्रणी भूमिका, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भारत के प्रभाव को दर्शाती है, जो अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र और भू-राजनीति से संबंधित प्रश्नों के लिए उपयोगी है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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