✎ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के लिए आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर कार्य कर रहे हैं।
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नीति आयोग ने हाल ही में इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया, जिसमें नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बदलाव हो रहा है, जिसमें अमेरिका में 10%, यूरोपीय संघ में 25% से अधिक और चीन में 50% से अधिक हिस्सेदारी दर्ज की गई है। भारत के लिए यह बदलाव आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की 89% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र, जो जीडीपी में 7.1% योगदान देता है और लगभग 1.9 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है, को इस वैश्विक बदलाव के अनुरूप ढालना आवश्यक है। इसके अलावा, वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को देखते हुए स्वच्छ परिवहन की ओर बदलाव को तत्काल प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
नीति आयोग द्वारा शुरू किए गए आईईएमआई के दूसरे संस्करण में राज्यों के इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर आधारित एक डेटा आधारित ढांचा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पिछले एक वर्ष में राज्य स्तर पर स्कोर में सुधार हुआ है। राजीव गौबा ने राज्यों से सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण, चार्जिंग बुनियादी ढांचे के समान भौगोलिक वितरण और अनुसंधान-नवाचार में निवेश को बढ़ावा देने का आग्रह किया। सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए 92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जा रही है, जिसमें फेम, पीएम ई-ड्राइव, पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएं और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, यूनिफाइड भारत ई-चार्ज ऐप के माध्यम से चार्जिंग बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया जा रहा है
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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