✎ एफएमडी नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा 2030 तक मुक्ति लक्ष्य, 147.16 करोड़ वैक्सीन खुराक और पीपीपी मॉडल पर जोर।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत में एफएमडी-मुक्त क्षेत्र विकास पर आयोजित डब्ल्यूओएच पीवीएस-पीपीपी लक्षित सहायता कार्यशाला का समापन राज्य कार्य योजनाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने पर केंद्रित रहा। यह तीन दिवसीय कार्यशाला 15-17 सितंबर, 2026 तक राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी), 12 राज्य पशुपालन विभागों, डब्ल्यूओएच, उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य कार्य योजनाओं को परिष्कृत कर एफएमडी-मुक्त क्षेत्रों की स्थापना में तेजी लाना था, जिसमें पीपीपी मॉडल, तकनीकी मानकों और डब्ल्यूओएच मान्यता आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यशाला में राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं के सत्यापन के साथ-साथ नौ प्राथमिकता प्राप्त राज्यों के हितधारकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर तकनीकी प्रतिक्रिया दी गई, जिससे निगरानी, टीकाकरण और पशु चिकित्सा अवसंरचना में सुधार के उपायों को अंतिम रूप दिया गया।
इस आयोजन का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि यह सरकारी योजनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और पशुधन स्वास्थ्य जैसे विषयों को कवर करता है। बैंकिंग परीक्षाओं में सरकारी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन, वित्तीय सहायता और पीपीपी मॉडल से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि एसएससी में नीति निर्माण और कार्यान्वयन प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। आरबीआई ग्रेड बी में कृषि एवं पशुधन क्षेत्र से जुड़े आर्थिक पहलुओं, जैसे टीकाकरण अभियानों के वित्तपोषण और निर्यात संवर्धन पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, यह कार्यशाला भारत की पशुधन निर्यात क्षमता को बढ़ाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को भी दर्शाती है, जो समसामय
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


1 comment on “भारत में एफएमडी-मुक्त क्षेत्र निर्माण: पीवीएस-पीपीपी कार्यशाला का सफल समापन, जानें मुख्य बिंदु”