✎ मंदिरों में हाथियों के अधिग्रहण पर रोक हटाने के मामले में न्यायालय ने पक्षों को सुनने के महत्व पर जोर दिया और राज्य सरकार को पुनर्वास संबंधी निर्णय लेने का अधिकार दिया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के मंदिरों को हाथी रखने से रोके जाने के आदेश को रद्द किया**
मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 2 सितंबर, 2026 को तमिलनाडु सरकार द्वारा मंदिरों को हाथी रखने से रोकने तथा सभी कैद हाथियों को सरकारी पुनर्वास गृहों में स्थानांतरित करने के आदेश को रद्द कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी तथा न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि ऐसा आदेश तब तक वैध नहीं हो सकता जब तक संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया हो। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु कैद हाथी (प्रबंधन एवं रखरखाव) नियम, 2011, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत बनाए गए हैं, जो मंदिरों सहित सभी कैद हाथियों के रखरखाव के लिए पूर्ण कानून प्रदान करते हैं। न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्तिगत मामले में दिए गए आदेश द्वारा ऐसे नियमों को प्रभावी रूप से खारिज नहीं किया जा सकता जब तक नियम स्वयं चुनौती में न हों।
यह निर्णय बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, अधीनस्थ विधान तथा न्यायिक सक्रियता के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया है। बैंकिंग परीक्षाओं में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रश्न, जैसे अधिनियमों के प्रावधान एवं सरकारी नीतियों के कानूनी पहलू, पूछे जा सकते हैं। एसएससी में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण विषय के तहत नियमों एवं उनके कार्यान्वयन पर आधारित प्रश्न संभव हैं। आरबीआई ग्रेड बी में नीति निर्माण एवं कानूनी ढांचे के विश्लेषण से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं, जो इस निर्णय के माध्यम से स्पष्ट होते हैं।
स्रोत: The Hindu
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