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Wayanad monsoon crisis: rainfall deficit hits 37% amid El Niño impact — labelled illustration

✎ वायनाड में 37% वर्षा कमी के कारण जल संकट और कृषि प्रभावित, अल नीनो और जलवायु परिवर्तन मुख्य कारक हैं।

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वायनाड में मानसून संकट: एल नीनो के प्रभाव से 37% बारिश की कमी

केरल के वायनाड जिले में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 1 जून से 31 अगस्त तक मात्र 1,391 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य औसत 2,200 मिमी से लगभग 37% कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, यह कमी एल नीनो प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के कारण गहराई है, जिससे जिले में गंभीर जल संकट और कृषि संकट उत्पन्न होने की आशंका है। अगस्त में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन कुल मिलाकर बारिश की कमी पूरी नहीं हो सकी। विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक हल्की बारिश के बजाय तीव्र, अल्पकालिक वर्षा से मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता कम हो रही है, जिससे भूजल स्तर गिर रहा है और गर्मियों में पेयजल संकट बढ़ने की आशंका है।

यह घटना बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक प्रभावों के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है। बारिश की कमी से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है—जो वित्तीय स्थिरता और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है। इसके अलावा, एल नीनो जैसी वैश्विक घटनाओं का भारतीय मानसून पर प्रभाव, आईएमडी और सरकारी योजनाओं के लिए भी अध्ययन का विषय है।

स्रोत: The Hindu


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