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SIR orders unanimous, Form 6 changes upheld by Supreme Court: Election Commission issues statement amid dissent row — labelled illustration

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को बरकरार रखने तथा सभी निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया जाना स्वीकार करने के बाद निर्वाचन आयोग ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित सभी फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने बताया कि आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी द्वारा केंद्रीय सचिवालय को लिखे गए पत्रों का निर्वाचन आयोग की किसी नीति अथवा आईटी संबंधी निर्णयों से कोई संबंध नहीं है। उनका पत्र एक ऐसे अधिकारी से संबंधित था जो आयोग में deputed थे तथा उनके द्वारा किए गए कार्य आवंटन में बदलाव को लागू नहीं किया गया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि आईटी विभाग के पर्यवेक्षण पर उप-निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की नियुक्ति बरकरार रही है तथा सभी निर्णय विधिवत प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं।

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इस मुद्दे की प्रासंगिकता बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों का सीधा संबंध संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा लोकतंत्र के संस्थागत ढांचे से है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची की पुनरीक्षा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसका प्रभाव प्रशासनिक दक्षता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा वित्तीय समावेशन जैसे विषयों से जुड़ा होता है। इसके अतिरिक्त, निर्वाचन आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का पालन करना तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेना संवैधानिक शासन प्रणाली के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो परोक्ष रूप से बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्रों में नियामक संस्थाओं की भूमिका के समानांतर है।

स्रोत: Mint


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