✎ निर्वाचन आयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन ने सीईसी को हटाने की मांग उठाई**
हाल ही में कर्नाटक के रायचूर में सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को निलंबित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो ने सीईसी द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णयों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी, जिससे संस्थागत पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस तरह के मामले चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहे हैं और लोकतंत्र के लिए खतरा बन रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने गोवा जैसे राज्यों में मतदाता पंजीकरण अधिकारी द्वारा सॉफ्टवेयर संबंधी खराबी के कारण 97 पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर रहने की घटनाओं का भी हवाला दिया। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी को हटाने के साथ-साथ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुझाए गए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश की भागीदारी वाले मॉडल को लागू करने की मांग की।
इस मुद्दे का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और संवैधानिक ढांचे से संबंधित प्रश्न उठाए गए हैं। इन परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान और करेंट अफेयर्स के तहत चुनाव प्रणाली, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और उनके सामने आने वाली चुनौतियों जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी नीतियों, संवैधानिक प्रावधानों और न्यायपालिका द्वारा दिए गए निर्देशों के संदर्भ में भी इस मुद्दे को समझना आवश्यक है। ऐसे मामलों से परीक्षार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और सुधार के प्रयासों के बारे में गहन जानकारी प्राप्त होती है, जो उनके समग्र
स्रोत: The Hindu
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