✎ अगामी 'सुपर' एल नीनो से भारत के पारिस्थितिकी तंत्र एवं कृषि को गंभीर खतरा है, जिसके लिए तुरंत तैयारी आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत के वैज्ञानिकों और पारिस्थितिकीविदों ने आने वाले ‘सुपर’ एल नीनो के खतरों को देखते हुए नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं से इस वैश्विक मौसम घटना के प्रभावों का अध्ययन करने तथा भारत की तैयारी के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है। प्रशांत महासागर में एल नीनो के कारण तापमान में वृद्धि हुई है, जो भारतीय मानसून को कमजोर करता है तथा भीषण गर्मी और सूखे का कारण बनता है। प्रवाल भित्तियों के कोरल कोर से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, इस बार तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है, जो पिछले एक हजार वर्षों में सर्वाधिक है। इससे न केवल कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, बल्कि वन्यजीवों के व्यवहार तथा वनस्पतियों के उत्पादन में भी सूक्ष्म लेकिन गंभीर परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
इस ‘कॉल टू एक्शन’ में वैज्ञानिकों से आग्रह किया गया है कि वे इस चेतावनी का लाभ उठाकर भारत की प्रकृति पर एल नीनो के प्रभावों का व्यापक अध्ययन करें, ताकि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीला बनाया जा सके। विशेषज्ञों ने चेताया है कि पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में बड़े पेड़ों पर गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव के कारण पेड़ों की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। यह घटना नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि इससे प्राप्त ज्ञान भविष्य की आपदाओं से निपटने तथा कृषि, जल संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में सहायक होगा। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए यह विषय इसलिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि इससे पर्यावरणीय जोखिमों, जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभावों तथा नीति निर्माण के महत्व को समझने में मदद मिलती है।
स्रोत: The Hindu
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