✎ एशियाटिक सोसाइटी भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं प्रसार के लिए केंद्रित संस्था है, जिसका उद्घाटन गृह मंत्री द्वारा किया गया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई द्वारा आयोजित ‘गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार पर जोर दिया, जिसमें महाराष्ट्र की भूमि को सरस्वती की ऊर्जा का प्रतीक बताया। श्री शाह ने कहा कि एशियाटिक सोसाइटी को ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से जोड़कर देशभर के पुस्तकालयों के साथ ज्ञान साझा करने तथा पांडुलिपियों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने इंडोलॉजी के औपनिवेशिक दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला, जिसमें ज्ञान को परिभाषित करने के बजाय उसे मुक्त और उन्मुक्त रखने की आवश्यकता बताई गई। श्री शाह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उद्देश्य विश्व कल्याण रहा है, न कि किसी विचारधारा का बंधन, और इसे आधुनिक भारत की नींव के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए।
यह घटना बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं, जो सामान्य जागरूकता अनुभाग में पूछे जाते हैं। एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई जैसे संस्थानों का उल्लेख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के संदर्भ में किया जाता है, जबकि ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन जैसी पहलों का संबंध सांस्कृतिक धरोहर एवं डिजिटलीकरण से है, जो वर्तमान सरकार की नीतियों का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, इंडोलॉजी और औपनिवेशिक दृष्टिकोण जैसे विषय इतिहास एवं समाजशास्त्र के पाठ्यक्रमों में भी शामिल होते हैं, जिससे परीक्षाओं में प्रश्न आने की संभावना रहती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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