✎ आंध्र प्रदेश में लैंगिक रूढ़िवादिता को दूर करने और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु पाठ्यक्रम सुधार किए गए हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Society
**एपी के पाठ्यपुस्तकों में लैंगिक रूढ़ियों को चुनौती देने के लिए संशोधन: मानव संसाधन विकास मंत्री लोकेश**
आंध्र प्रदेश सरकार ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बड़े पैमाने पर संशोधन किया है, जिसमें लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने और बच्चों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा करने पर जोर दिया गया है। कक्षा एक और दो की पाठ्यपुस्तकों में पहले महिलाओं को मुख्य रूप से घरेलू कार्यों में ही चित्रित किया जाता था, लेकिन अब इनमें पुरुषों और महिलाओं के बीच घरेलू जिम्मेदारियों को 50-50 प्रतिशत के आधार पर बाँटा गया है। मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि यह बदलाव बच्चों को शुरुआती दौर से ही लैंगिक समानता की ओर प्रेरित करेगा। उन्होंने शिक्षा सुधारों के अंतर्गत मूल्य-आधारित सीख, पाठ्यक्रम सुधार, तकनीक-संचालित शिक्षा और उद्योग से जुड़े कौशल विकास पर जोर दिया। इसके अलावा, राज्य में प्रति वर्ष लगभग 16,000 शिक्षकों की भर्ती की जा रही है, जिससे ‘एक कक्षा, एक शिक्षक’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा के क्षेत्र में ये प्रयास न केवल समाज में समानता को बढ़ावा देंगे, बल्कि भावी पीढ़ी को अधिक जिम्मेदार और तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाएंगे।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से देखा जाए तो लैंगिक समानता और समाज में इसके प्रभाव जैसे विषय करेंट अफेयर्स के महत्वपूर्ण पहलू हैं। बैंकिंग क्षेत्र में, विशेष रूप से आरबीआई जैसी संस्थाओं द्वारा लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों को लागू किया जाता है, जैसे कि महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराना। इसी प्रकार, एसएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं में समाज कल्याण, शिक्षा सुधार और लैंगिक समानता जैसे विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए
स्रोत: The Hindu
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