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Jagan calls Lokesh’s claim of 82.1% literacy in Andhra false, cites Centre’s survey showing 71.4% — diagram
Andhra literacy claimsJagan Mohan Reddy (YSRCP)Nara Lokesh (TDP)literacy rate71.4%82.1%sourceCentre's surveyAkshara Andhra driveyear2026 (unreleased)2026 (claimed)
Andhra literacy claims

✎ आंध्र प्रदेश में साक्षरता दर के आँकड़ों पर राजनीतिक विवाद, केंद्र के PLFS सर्वेक्षण के अनुसार 2025 में 71.4% दर सही।

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**हिंदी में नोट (प्राकृतिक परीक्षा हिंदी):**

आंध्र प्रदेश में साक्षरता दर को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने हाल ही में दावा किया कि वर्ष 2024 में 72.6% रही साक्षरता दर 2026 में बढ़कर 82.1% हो गई है, जिसे उन्होंने ‘अक्षर आंध्र’ अभियान के माध्यम से प्राप्त उपलब्धि बताया। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के ‘पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (PLFS) 2023-24 के अनुसार राज्य की साक्षरता दर 72.6% ही थी, जबकि 2025 के सर्वेक्षण (जुलाई 2026 में प्रकाशित) में यह घटकर 71.4% रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता में सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है और निजी स्कूलों में बढ़ रहा है। सरकार के शिक्षा सुधारों पर सवाल उठाते हुए जगन ने कहा कि नीति-निर्माताओं को शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच पर ध्यान देना चाहिए, न कि झूठे आंकड़ों का प्रचार करना चाहिए।

यह विवाद न केवल राज्य की शिक्षा नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक सबक है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें शासन, आर्थिक विकास और सामाजिक सूचकों जैसे विषय शामिल हैं। सरकारी योजनाओं की सफलता या विफलता का आकलन करते समय साक्षरता दर जैसे मानकों का सही आकलन आवश्यक है, जिससे नीति-निर्माताओं को वास्तविक डेटा के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलती है। इसके अलावा, शिक्षा क्षेत्र में निवेश और सुधारों के प्रभाव का मूल्यांकन भी इन परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल है, जिससे उम्मीदवारों को देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की गहरी समझ विकसित होती है।

स्रोत: The Hindu


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