✎ भारत-नीदरलैंड जल सहयोग से गुजरात की कल्पसर परियोजना को तकनीकी सहायता मिलेगी और जल प्रबंधन में नवाचार होगा।
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**आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026 में भारत-नीदरलैंड की जल साझेदारी: कल्पसर परियोजना और रणनीतिक सहयोग**
9वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक द्विपक्षीय बैठक में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन उप-मंत्री जाप स्लूटमेकर ने भारत-नीदरलैंड के जल क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। इस बैठक में गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके तहत केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), गुजरात सरकार और डच संस्थानों डेल्टारेस तथा टीयू डेल्फ़्ट के बीच दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने बताया कि इस परियोजना में साबरमती, माही और धाधर नदियों के जल का उपयोग करते हुए एक विशाल मीठे पानी के जलाशय का निर्माण किया जाएगा, जिसमें नर्मदा नदी से अतिरिक्त जल भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने नीदरलैंड के अफस्लुइटडिज्क जैसे अनुभवी जल प्रबंधन मॉडलों के आधार पर तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने पर जोर दिया, जो बाढ़ सुरक्षा, तटीय अवसंरचना और पारिस्थितिकी जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए उपयोगी साबित होगा।
यह सहयोग भारत के लिए जल संसाधन प्रबंधन, कृषि और शहरी जलापूर्ति जैसी चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जबकि नीदरलैंड को अपनी विशेषज्ञता का वैश्विक स्तर पर विस्तार करने का अवसर मिलेगा। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए यह विषय इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि इसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और सरकारी नीतियों जैसे विषय शामिल हैं, जो वर्तमान में भारत की विकासात्मक प्राथमिकताओं का हिस्सा हैं। इसके अलावा, जल सुरक्षा और सतत विकास जैसे मुद्दे
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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