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उत्तराखंड में 5 साल तक 3% राजकोषीय घाटा, एफआरबीएम संशोधन विधेयक 2026 पेश
उत्तराखंड वित्तीय अनुशासन प्रक्रियाकड़े मानक लागू5 साल तकविधेयक पेशएफआरबीएम 2026राजकोषीय घाटा3% तक सीमित
उत्तराखंड वित्तीय अनुशासन प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

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उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत बनाने के लिए उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया है, जिसमें 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3% तक सीमित रखने तथा कुल ऋण को जीएसडीपी के 30% तक सीमित रखने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे राज्य के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त, पूंजीगत निवेश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अतिरिक्त व्यय को राजकोषीय घाटे की गणना से बाहर रखा जाएगा, जबकि सीमा से अधिक घाटे की स्थिति में सरकार को विधानसभा में कारणों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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यह विषय बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, राजकोषीय घाटे, जीएसडीपी और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। एफआरबीएम अधिनियम का उद्देश्य सरकारों द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और ऋण के बोझ को नियंत्रित करना है, जो बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, राज्य के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता में सुधार होगा, जो परोक्ष रूप से बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचाएगा।

स्रोत: amarujala.com


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