✎ NHRC द्वारा जारी नोटिस के बाद ही सरकारें रिपोर्ट जमा करती हैं, जिससे मानवाधिकार मामलों के निस्तारण में देरी होती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन ने कहा कि अधिकारियों को नोटिस जारी करने के बाद ही अधिकतर रिपोर्टें प्रस्तुत की जाती हैं। उन्होंने बताया कि पूरे देश में यह प्रवृत्ति देखने को मिलती है कि जब एनएचआरसी पहली बार एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगता है, जिसकी समय-सीमा दो से चार सप्ताह होती है, तो वह समय पर प्रस्तुत नहीं होती। पहले रिमाइंडर देने के बाद भी यदि रिपोर्ट नहीं आती, तो एनएचआरसी धारा 13(1) के तहत संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का नोटिस जारी करता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर इसी समय सीमा के भीतर रिपोर्टें प्रस्तुत कर दी जाती हैं।**
**इस मुद्दे का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें शासन व्यवस्था, जवाबदेही और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। बैंकिंग क्षेत्र में जहां समयबद्ध निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, वहीं सरकारी विभागों में देरी से रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी प्रशासनिक दक्षता, कानूनी ढांचे और मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जो इस घटना के माध्यम से स्पष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त, एनएचआरसी जैसे संस्थानों की भूमिका और उनके द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे के मामलों का भी परीक्षा दृष्टिकोण से अध्ययन आवश्यक है।**
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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