प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने तेलंगाना के सिद्दीपेट विधायक और पूर्व मंत्री टी. हरिश राव के खिलाफ ‘जादू-टोना’ और ‘तांत्रिक अनुष्ठानों’ के सार्वजनिक आरोपों पर एफआईआर दर्ज न करने संबंधी शिकायत पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तेलंगाना को चार सप्ताह के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। शिकायतकर्ता करुपोथुला रेवंत ने आरोप लगाया है कि मंदिरों में वर्षा रोकने और सूखे का कारण बनने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान करने के बार-बार सार्वजनिक आरोपों के बावजूद न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही इसके लिए कोई कारण बताया गया। शिकायत ओसmania विश्वविद्यालय और वनस्थलिपुरम पुलिस स्टेशनों में 4 अगस्त, 2026 को दर्ज कराई गई थी, जबकि डीजीपी कार्यालय में 17 अगस्त, 2026 को एक प्रतिनिधित्व दिया गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यह मामला शासन और कानून व्यवस्था के प्रति पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तथा मानवाधिकार संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में प्रशासनिक सुधार, पुलिस सुधार और मानवाधिकार संरक्षण जैसे विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को समझने के लिए भी यह मामला प्रासंगिक है। सरकारी नीतियों और प्रशासनिक तंत्र के प्रति उम्मीदवारों की समझ को परखने के लिए भी यह विषय उपयोगी हो सकता है।
स्रोत: The Hindu
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