✎ एनएसई का 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ सेबी की मंजूरी के बाद भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से लगभग 30,000 करोड़ रुपये के अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए अंतिम अनुमोदन प्राप्त हो गया है। यह भारतीय शेयर बाज़ार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक होगा। सेबी द्वारा अंतिम टिप्पणियाँ प्राप्त करना आईपीओ प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बाद कंपनी सार्वजनिक निर्गम के लिए आगे की तैयारियाँ कर सकेगी। एनएसई की सूचीकरण योजनाएँ लगभग एक दशक से नियामक बाधाओं, जिसमें सह-स्थान विवाद भी शामिल है, के कारण रुकी हुई थीं। प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से बिक्री के प्रस्ताव (ओएफएस) होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक एक्सचेंज के लगभग 6 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेंगे। इसमें प्रमुख शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक 2.48 करोड़ शेयर और एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयर बेचेंगे। इससे एक्सचेंज का बाज़ार पूंजीकरण 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो इससे पहले के रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा।
यह घटना बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंक पीओ एवं आईबीपीएस परीक्षाओं में शेयर बाज़ार, आईपीओ प्रक्रिया एवं नियामक संस्थाओं जैसे सेबी की भूमिका से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय बाज़ारों से जुड़े विषयों पर प्रश्न होते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में नियामक ढाँचे एवं पूंजी बाज़ार के गतिशील पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस प्रकार, एनएसई के आईपीओ को लेकर सेबी के अनुमोदन की जानकारी परीक्षार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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