✎ स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) कचरा उठाने वालों को स्वरोजगार एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर उनके जीवनस्तर में सुधार करती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security
कचरा उठाने वाले समुदायों के आर्थिक उत्थान और वित्तीय सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ‘स्वच्छता उद्यमी योजना’ (एसयूवाई) एक मील का पत्थर साबित हो रही है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाले चेवूरी अंजनेयुलु की कहानी इससे प्रमाणित होती है। उन्होंने सात वर्षों तक कचरा उठाने का काम किया, लेकिन आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव के कारण उन्हें शिक्षा और बेहतर जीवनस्तर के अवसर नहीं मिल सके। 2023 में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा एसयूवाई के तहत 35 लाख रुपये की ग्रुप परियोजना से उन्हें 17.5 लाख रुपये का ऋण और सब्सिडी मिली, जिससे उनकी मासिक आय में 10,000 रुपये की वृद्धि हुई। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उनके दोनों बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में प्रवेश मिला। यह योजना न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बन रही है, बल्कि वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को भी बढ़ावा दे रही है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
एसयूवाई जैसी योजनाएं सरकार की ‘नमस्ते कार्यक्रम’ का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य स्वच्छता कर्मचारियों को सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना है। यह योजना न केवल उनके कौशल विकास में सहायक है, बल्कि उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह मॉडल इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलता है, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में सरकारी योजनाओं, वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस तरह की पहलों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है, बल्कि देश के समग्र विकास में भी योगदान मिलता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


1 comment on “एसयूवाई योजना से मिला कचरा उठाने वालों को आर्थिक सशक्तिकरण: चेवुरी अंजनेयुलु की सफलता”