✎ ओडिशा डीजीपी चयन में पारदर्शिता एवं कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: General Studies
**ओडिशा डीजीपी चयन: अवकाश के दिन मिली अनुमति**
सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा डीजीपी चयन मामले की सुनवाई चल रही है, जिसमें न्यायालय द्वारा नियुक्त अमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने 7 सितंबर को तीन न्यायाधीशों वाली पीठ को एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 2006 के प्रकाश सिंह मामले के फैसले का पालन नहीं किया। अमिकस क्यूरी ने बताया कि सरकार ने दो समान रैंक के अधिकारियों को डीजी स्तर पर जल्दबाजी में पदोन्नत किया। राज्य सरकार ने 14 मई, 2026 को यूपीएससी को 11 आईपीएस अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें से तीन को डीजीपी पद के लिए चुना जाना था। हालांकि, 3 अगस्त को राज्य सरकार ने यूपीएससी से 2025 परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की प्रगति और 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ की भूमिका के बारे में पूछा। अगले दिन यूपीएससी ने जवाब दिया कि नाथ से पूछताछ की जा सकती है। इसी आधार पर उनके सेवा रिकॉर्ड वापस ले लिए गए और उन्हें डीजीपी चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। राज्य सरकार ने 8 अगस्त को गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर 1994 बैच के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों संजीब पांडा और यशवंत जेठवा को डीजी स्तर पर पदोन्नत करने का प्रस्ताव भेजा, जिसे अगले दिन अनुमति मिल गई। 10 अगस्त को इन दोनों अधिकारियों को डीजी स्तर पर पदोन्नत कर दिया गया, हालांकि पांडा ने केवल 30 वर्ष, 11 माह और 14 दिन सेवा पूरी की थी। अमिकस क्यूरी ने बताया कि यूपीएससी के साथ बैठक से 48 घंटे पहले एक अधिकारी को सूची से हटा दिया गया और 72 घंटे बाद दो अधिकारियों को डीजी स्तर पर पदोन्नत कर दिया गया।
यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के महत्व को रेखांकित करता है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के सामान्य अध्ययन अनुभाग के लिए प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में पदोन्नति और चयन प्रक्रिया में पारद
स्रोत: orissapost.com
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