✎ राज्यपाल द्वारा केपीएससी अध्यक्ष के निलंबन में मंत्रिपरिषद की सहमति आवश्यक है, अन्यथा निलंबन अमान्य माना जाएगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केएसपीसी) के अध्यक्ष को निलंबित करने की शक्ति पर राज्यपाल के अपील की जांच करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरappa एस. साहूकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें राज्यपाल के विशेष सचिव द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की गई है। अपील में एकल न्यायाधीश के हालिया फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल आपातकालीन स्थिति में भी मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना अध्यक्ष को निलंबित नहीं कर सकते। इसके अलावा, बाद में मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन को भी अवैध माना गया था। उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
यह मामला संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत राज्यपाल की शक्तियों और मंत्रिपरिषद की भूमिका के बीच संतुलन को रेखांकित करता है। राज्यपाल के अपील में यह तर्क दिया गया है कि बाद में मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन से राज्यपाल के निलंबन आदेश की वैधता बहाल हो जाती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के *पी.पी. सिंह* मामले में दिए गए फैसले पर आधारित है। यह मामला न केवल राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका बल्कि लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता के लिए भी महत्वपूर्ण है। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों, मंत्रिपरिषद की भूमिका और न्यायिक पुनर्विलोकन के सिद्धांतों के अध्ययन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है।
स्रोत: The Hindu
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