✎ सड़क सुरंग परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर न्यायिक हस्तक्षेप और कानूनी चुनौतियों की समझ आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह लाल बाग़ में ३ अरब वर्ष पुराने प्रायद्वीपीय नीस (Peninsular Gneiss) पर १६.७५ किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के प्रभाव पर भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) की रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह स्मारक जीएसआई द्वारा राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक स्मारक घोषित किया गया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने अधिकारियों को इंजीनियरों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले एक प्रस्तुतीकरण का भी आयोजन करने का निर्देश दिया, जिसमें हेब्बल झील में जल के प्रवाह एवं निर्गम पर टनल निर्माण के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों पर स्पष्टीकरण दिया जाएगा। यह टनल २.२ किलोमीटर लंबी तीन लेन वाली ट्रांज़िट टनल है, जो हेब्बल जंक्शन से कर्नाटक पशु चिकित्सा, पशुपालन एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय (केवीएएफएसयू) तक फैली हुई है। न्यायालय ने यह निर्देश पीआईएल याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें इन दोनों परियोजनाओं की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों में बताया गया है कि यह परियोजना झील में जल के प्रवाह एवं निर्गम को बाधित करेगी तथा ३.४ एकड़ भूमि झील के विपरीत कानून के तहत आवंटित की जाएगी। हालांकि, राज्य के महाधिवक्ता ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि टनल निर्माण झील के बफर क्षेत्र के नीचे किया जा रहा है तथा जल स्रोतों के प्रवाह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अधिकारियों को अगले सप्ताह तक प्रस्तुतीकरण तैयार करने तथा जीएसआई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह मामला बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी तथा एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें सरकारी परियोजनाओं, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, भू-वैज्ञानिक स्मारकों की सुरक्षा तथा न्यायिक हस्तक्षेप जैसे
स्रोत: The Hindu
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