KPSC ChairpersonGovernorKarnataka High CourtPresidentInquiry✎ कर्नाटक पीएससी मामले में उच्च न्यायालय ने राज्यपाल के निलंबन को गैरकानूनी करार दिया और अध्यक्ष को बहाल करने का आदेश दिया, जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप पर न्यायिक नजरिया स्पष्ट हुआ।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केएसपीसी) के अध्यक्ष शिवशंकरappa एस. साहूकार के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय को उनकी जांच के लिए भेजा है, जबकि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा उनकी निलंबन को रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने माना कि राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह के बिना निलंबन का आदेश दिया था, जिससे यह कानूनन अवैध हो गया। न्यायमूर्ति सुराज गोविंदराज ने फैसले में कहा कि राज्यपाल का आदेश कानून के विपरीत था, क्योंकि उन्होंने मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना निलंबन का आदेश पारित किया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने साहूकार को सात दिनों के भीतर बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन उन्हें अपनी दोनों बेटियों के चयन से संबंधित किसी भी निर्णय में भाग लेने से रोका गया है। इसके अलावा, उन्हें निलंबन अवधि के दौरान हुए सभी वित्तीय लाभों का भी हकदार माना गया है।
इस मामले का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों की निलंबन और जांच प्रक्रिया से संबंधित है। यह मामला राज्यपाल, राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक शक्तियों के संतुलन को भी दर्शाता है, जो परीक्षा में संविधान के अध्यायों जैसे राज्यपाल की भूमिका, लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता और न्यायिक पुनर्विलोकन जैसे विषयों से पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता जैसे मुद्दे भी समसामयिक मामलों के रूप में परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं, जो उम्मीदवारों को संविधान के मूल सिद्धांतों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ रखने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
स्रोत: The Hindu
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