
✎ अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत केवल 19% स्टेशनों का ही विकास पूर्ण हुआ है, जिससे कार्यान्वयन की धीमी गति का पता चलता है।
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केन्द्र सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए गए एक जवाब के अनुसार, कर्नाटक के 61 रेलवे स्टेशनों में से केवल 12 स्टेशनों पर ही अमृत भारत स्टेशन योजना (एबीएसएस) के तहत विकास कार्य पूरा हुआ है, जबकि पूरे देश में कुल 1,340 स्टेशनों में से सिर्फ 261 स्टेशनों पर ही काम पूरा हुआ है। यह आँकड़ा लगभग 19 प्रतिशत है, जो बताता है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति अपेक्षित गति से बहुत धीमी है। कर्नाटक के जिन 12 स्टेशनों पर काम पूरा हुआ है, उनमें अलनावर, बादामी, बागलकोट, बंटवाल, धारवाड़, गदग, गोकाक रोड, होस्पेट, कोप्पल, मुनीराबाद, रानीबेन्नूर और सुब्रमण्य रोड शामिल हैं। राज्यसभा सदस्य Mansoor Ali Khan ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल घोषणाओं और शिलान्यास समारोहों के बजाय परियोजनाओं के पूर्ण परिणामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि जनता को वास्तविक विकास की अपेक्षा है।
इस योजना की धीमी प्रगति के पीछे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विभिन्न कारण बताए हैं, जैसे कि स्टेशनों के पास सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना, विभिन्न वैधानिक मंजूरी लेना, और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में आने वाली चुनौतियाँ। उन्होंने कहा कि चूंकि स्टेशन पहले से ही चालू हैं, इसलिए कार्य के दौरान यात्रियों की आवाजाही में बाधा न आए, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाती है, जिससे काम पूरा होने में देरी हो रही है। इस मुद्दे की गहराई से पड़ताल करने पर यह स्पष्ट होता है कि अमृत भारत स्टेशन योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है, ताकि जनता और संसद को योजना की वास्तविक प्रगति का पता चल सके। यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे शासन व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सार्वजनिक नीति के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित होती है।
स्रोत: The Hindu
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