
✎ कर्नाटक में सूखे और पारिस्थितिकी रिपोर्ट पर विशेष सत्र से राज्य को राहत और नीति निर्माण में मदद मिलेगी।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
कर्नाटक सरकार ने 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र बुलाया है, जिसमें राज्य में सूखे की स्थिति और कस्तूरिरंगन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पहले ही इस विशेष सत्र की घोषणा की थी, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित मसौदे में कर्नाटक के 1,439 गांवों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि राज्य गंभीर सूखे से जूझ रहा है और अगर सितंबर के दूसरे सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो यह हाल के वर्षों में सबसे खराब सूखे का सामना कर सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सूखे से प्रभावित तालुकों की दूसरी सूची जारी करेगी, जिसमें लगभग 50 से 60 तालुकों को शामिल किया जा सकता है। केंद्र के सूखा मैनुअल 2020 के अनुसार, अब तक 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है।
इस विशेष सत्र का आयोजन न केवल सूखे की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जा रहा है, बल्कि इससे राज्य सरकार की प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों पर भी प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से, केंद्र से सूखे से निपटने के लिए अतिरिक्त धन की मांग की जाएगी, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कस्तूरिरंगन समिति की रिपोर्ट पर चर्चा से राज्य में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी उजागर होगी, जो आर्थिक विकास और बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, सरकार द्वारा अनुमोदित 4,500 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और किसानों को मुआवजा देने जैसी योजनाएं राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी, जिससे बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
स्रोत: The Hindu
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