✎ महिलाओं पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश से केरल में राजनीतिक और सामाजिक विवाद उत्पन्न हुआ है, जिसमें धार्मिक मान्यताओं और महिला अधिकारों के बीच टकराव देखा जा रहा है।
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कंथपुरम के निर्देश पर महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों से सीपीआई(एम) के संबंधों में तनाव
केरल में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख नेता कंथपुरम ए.पी. अबूबक्कर मुसलियार द्वारा मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों में भागीदारी पर लगाए गए प्रतिबंधों के निर्देश ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुसलियार ने अपने संगठन समस्ता के अधीन आने वाले मस्जिदों और मदरसों को निर्देश दिया कि वे धार्मिक आयोजनों में महिलाओं को अपरिचित पुरुषों के साथ मंच या सार्वजनिक स्थान साझा करने से रोकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामी त्योहारों में अन्य संस्कृतियों के रीति-रिवाजों को शामिल नहीं किया जाए। मुसलियार ने बाद में कोच्चि में आयोजित एक बैठक में दोहराया कि महिलाओं को घर पर ही रहना चाहिए, क्योंकि उनके सार्वजनिक उपस्थिति से “अराजकता” फैल सकती है। उनके इस बयान की सीपीआई(एम) नेताओं और महिला संगठनों ने तीखी आलोचना की। पूर्व मंत्री और सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति की सदस्य पी.के. श्रीमती ने इस निर्देश को वापस लेने की मांग की, जबकि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा ने इसे सामंती मानसिकता बताया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) की नेता सी.एस. सुजाता और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य सचिव पी.एस. संजीव ने भी इस निर्देश की आलोचना की। वहीं, मुसलियार के समर्थकों ने दावा किया कि यह निर्देश केवल आंतरिक धार्मिक मामलों से संबंधित है और समाज पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीआई(एम) नेताओं द्वारा मुस्लिम महिलाओं की चिंता दिखाने का उद्देश्य अपने राजनीतिक हितों को साधना है।
यह विवाद केवल धार्मिक मामलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लैंगिक अधिकारों, धार्मिक स्वायत्तता और प्रगतिशील राजनीति के अर्थ पर बहस का रूप ले चुका है। केरल में सीपीआई(ए
स्रोत: The Hindu
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