✎ केरल में POCSO मामलों में वृद्धि कानूनी जागरूकता और बेहतर रिपोर्टिंग का परिणाम है, न कि अपराध में वास्तविक वृद्धि।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण समसामयिक विषय पर नोट:
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, राज्य में Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024 में जहां 4,607 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,765 हो गई। वर्ष 2013 में आयोग के गठन के समय यह संख्या मात्र 1,002 थी। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस वृद्धि का कारण अपराधों में वास्तविक वृद्धि नहीं, बल्कि कानूनी साक्षरता में सुधार, जागरूकता अभियानों के सशक्तिकरण और बच्चों के यौन अपराधों की रिपोर्टिंग में आई कमी से है। तिरुवनंतपुरम जिले में सर्वाधिक 689 मामले दर्ज किए गए, जबकि कोल्लम, मालापुरम और कोझिकोड में भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए। बाल अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण, जनसंख्या घनत्व और बेहतर रिपोर्टिंग तंत्र तक पहुंच के कारण कुछ जिलों में मामलों की संख्या अधिक है। बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और कानूनी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी प्रयासों की आवश्यकता है, जो बैंकिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में नीति निर्माण के लिए भी प्रासंगिक है।
इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि 86% पीड़ित बालिकाएं थीं, जबकि 13% बालक थे। सर्वाधिक जोखिम 15-18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को था, जिनमें 55% पीड़ित शामिल थे। अपराध अधिकतर निजी और परिचित स्थानों जैसे घरों, स्कूलों और रिश्तेदारों के घरों में घटित हुए, जिसमें 22% मामले पीड़ितों के घरों में और 13% अपराधियों के घरों में दर्ज किए गए। केवल 10% मामले सार्वजनिक स्थानों पर हुए। यह डेटा बाल संरक्षण नीतियों और सामाजिक सुरक्षा उपायों की
स्रोत: The Hindu
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