✎ कोरेगांव भीमा हिंसा मामले की 8 साल बाद सुनवाई पूरी, अक्टूबर 2026 में आएगी अंतिम रिपोर्ट।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**नोट:**
लगभग साढ़े आठ साल बाद, जब 1 जनवरी, 2018 को पुणे के कोरेगांव भीमा क्षेत्र में हुई हिंसा की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित कोरेगांव भीमा आयोग ने सबूत दर्ज करने की सुनवाई पूरी कर ली है। आयोग को अब अपना अंतिम प्रतिवेदन 31 अक्टूबर, 2026 तक राज्य सरकार को सौंपने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। आयोग के सचिव वी.वी. पालनिटकर ने बताया कि आयोग ने सभी गवाहों और संबंधित पक्षों को सुनने का पूरा अवसर दिया है और अब वह अपना प्रतिवेदन तैयार करेगा। इस दौरान 58 गवाहों, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार, पी.एस. आंबेडकर, पुलिस अधिकारी और ग्रामीण शामिल थे, के बयान दर्ज किए गए। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। आयोग ने शुरुआत में चार महीने में रिपोर्ट देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बार-बार विस्तार मिलने के बाद अब यह 23वां विस्तार है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी कार्यवाही बाधित हुई थी।
इस मामले की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, यह विषय संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। राजनीतिक हिंसा, कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दे इन परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए, पुलिस अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं और नागरिकों के बयानों का विश्लेषण कर आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में कानून व्यवस्था बनाए रखने के उपायों पर जोर दिया जा सकता है, जो सामान्य प्रशासनिक क्षमता (जीए) और राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से जुड़ा है। इसके अलावा, इस मामले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बार-बार आयोग को विस्तार दिए जाने के कारणों का अध्ययन भी प्रशासनिक सुधारों और सरकारी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो आरबीआई ग्रेड बी के पेपर-II में शामिल विषयों जैसे शासन और नीति निर्माण के लिए प्रासंगिक है।
स्रोत: The Indian Express
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