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Objections by two election commissioners on SIR-related decisions: Dangerous for democracy, CEC should be removed, says — labelled illustration

✎ चुनाव आयोग के भीतर मतभेद लोकतंत्र के लिए चिंताजनक और नागरिक अधिकारों पर प्रभाव डालने वाले हैं।

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हाल ही में, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित निर्णयों पर आपत्ति जताने के बाद विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार देते हुए सीईसी को हटाने की मांग की है। एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि यह मात्र राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर ही कार्यरत अधिकारियों द्वारा उठाई गई आपत्तियां इस बात का संकेत हैं कि व्यवस्था ध्वस्त हो रही है, जिससे नागरिकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। उन्होंने तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की।

इस विवाद के मद्देनजर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीईसी ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार ने गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर कार्य किया है, जिससे संविधानिक प्रक्रिया कमजोर हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए सीईसी को हटाना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतंत्र के मूल्यों पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस घटना से स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं, जो बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय है, जहां संविधानिक संस्थाओं की भूमिका एवं उनके सामने आने वाले संकटों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

स्रोत: The Indian Express


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