✎ कैग रिपोर्ट सरकारी खर्चों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग करती है, जिससे राजस्व हानि और भ्रष्टाचार के मामलों पर प्रकाश पड़ता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
राजनीति के क्षेत्र में कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है, जिसका सीधा संबंध प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन से है। हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर द्वारा उठाए गए आरोपों के अनुसार, कैग रिपोर्ट में सरकारी खरीद, ई-टेंडरिंग और बजटीय प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिनमें 438 करोड़ रुपये बिना बजटीय प्रावधान के खर्च किए जाने और 673 करोड़ रुपये की योजनाओं में व्यय न होने जैसी विसंगतियां शामिल हैं। ऐसे मामले न केवल राजस्व घाटे को बढ़ाते हैं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण वसूली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर डालते हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय जवाबदेही जैसे विषयों पर सवाल उठ सकते हैं। इसके अलावा, ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में आईपी एड्रेस से जुड़ी अनियमितताएं और विभागीय संसाधनों के दुरुपयोग जैसे मामले सरकारी नीतियों की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, जो आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी के सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम में शामिल ‘शासन व्यवस्था’ और ‘भ्रष्टाचार नियंत्रण’ जैसे विषयों के लिए प्रासंगिक हैं।
इस मामले का दूसरा पहलू यह है कि कैग रिपोर्ट में उजागर हुई कमियों का सीधा संबंध सरकारी खजाने पर पड़ने वाले दबाव से है, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ऋण नीति तथा राजकोषीय उत्तरदायित्व पर प्रभाव डाल सकता है। उदाहरण के लिए, राजस्व घाटे में वृद्धि से सरकारी योजनाओं के लिए धन आवंटन कम हो सकता है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वितरण और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के जोखिम बढ़ सकते हैं। साथ ही, उच्च न्यायालय द्वारा सरकारी नियुक्तियों को निरस्त करने जैसे फैसले प्रशासनिक पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के महत्व को रेखांकित करते हैं, जो आरबीआई ग्रेड बी के ‘कानूनी और नियामक ढांचे’ तथा
स्रोत: amarujala.com
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