✎ मत्स्यपालन अवसंरचना विकास से नीली अर्थव्यवस्था और तटीय आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
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केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में पुडुचेरी में 36.49 करोड़ रुपये की मत्स्यपालन अवसंरचना परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना, तटीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर उत्पन्न करना और नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। पीएम मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत शुरू की गई इन परियोजनाओं में थेनगैथिट्टू फिशिंग हार्बर का उन्नयन, नल्लावाडु में अत्याधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर की स्थापना तथा कराईकल में स्मार्ट और एकीकृत फिशिंग हार्बर का विकास शामिल है। ये अवसंरचनात्मक सुधार मछली के रख-रखाव, विपणन और सुरक्षा को बेहतर बनाएंगे, जिससे हजारों मछुआरों और 600 से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, पुडुचेरी में सहकारी-आधारित समुद्री शैवाल की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बहु-आयामी क्षमता निर्माण सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य महिला मछुआरों सहित सभी हितधारकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है।
यह पहल न केवल मत्स्य पालन क्षेत्र में रोजगार और आय में वृद्धि करेगी, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश में नीली अर्थव्यवस्था के विकास को भी गति प्रदान करेगी। सरकार द्वारा अपनाया गया क्लस्टर दृष्टिकोण, जिसमें कराईकल को ‘फिशिंग हार्बर क्लस्टर’ के रूप में अधिसूचित किया गया है, मछली कृषक उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और सहकारी समितियों को संस्थागत क्षमता निर्माण, वित्तीय संसाधनों और तकनीकी सहायता तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। इस प्रकार, यह परियोजना मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने, सहयोगात्मक विकास को बढ़ावा देने और तटीय समुदायों के समग्र कल्याण में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह विषय बैंकिंग
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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