✎ जगन्नाथ मंदिर की विरासत की रक्षा हेतु ट्रेडमार्क पंजीकरण से आईपी संरक्षण मिला, जिससे व्यावसायिक दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
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हाल ही में, ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के प्रशासन ने ‘श्री मंदिर’, ‘श्री नहर’ और ‘रत्न भंडार’ सहित 29 नामों और पहचानों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रेडमार्क) प्राप्त किया है। श्रीयजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने बताया कि ‘श्री मंदिर’ (कक्षा 19 और 45), ‘रत्न भंडार’ (कक्षा 14 और 45) तथा ‘श्री नहर’ (कक्षा 19) को ट्रेडमार्क रजिस्ट्री द्वारा प्रकाशन के लिए मान्यता दी गई है। इससे पहले, ‘अनंद बाजार’, ‘पतितपावन’ और ‘नीलाचक्र’ लोगो सहित तीन नामों को पहली बार में स्वीकृति मिली थी, जबकि दूसरी बार में ‘जगन्नाथ धाम’, ‘श्री क्षेत्र’, ‘महाप्रसाद’, ‘नीलाचक्र’ और ‘कोइली वैकुंठ’ को मान्यता प्राप्त हुई। पाधी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य मंदिर से जुड़े आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और संस्थागत विरासत की रक्षा करना तथा इसके नामों और पहचानों के अनधिकृत या अनुचित व्यावसायिक उपयोग को रोकना है। केंद्र सरकार के ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया’ ने अब 18 और शब्दों से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है, जिससे मंदिर की विरासत को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस मामले का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग परीक्षाओं में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जैसे ट्रेडमार्क, पेटेंट और कॉपीराइट। इसके अलावा, एसएससी में सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर प्रश्न आ सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं के बीच संबंध पर ध्यान दिया जाता है। पुरी मंदिर के इस कदम से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार किस प्रकार सांस्क
स्रोत: orissapost.com
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