✎ ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
बस्तर में आयोजित 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। यह कार्यशाला सहकारी क्षेत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के साथ-साथ सहकारी बैंकों की स्वायत्तता और प्रभावी निगरानी पर केंद्रित रही। सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने सहकारी संस्थाओं के पुनरुद्धार, डिजिटलीकरण, व्यवसाय विविधीकरण और बाजार तक पहुंच बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हुए राज्यों से सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने NCDC अधिनियम में हालिया संशोधन का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे उन संस्थाओं को भी वित्तीय सहायता मिल सकेगी जो सहकारी विकास को बढ़ावा देती हैं। इस कार्यशाला में राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं जैसे NCEL, NCOL और BBSSL के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों और बीज क्षेत्र में मजबूत मूल्य श्रृंखलाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस आयोजन का महत्व बैंकिंग, SSC और RBI Grade B परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यधिक है, क्योंकि यह सहकारी बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। सहकारी बैंकों के माध्यम से वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, जो बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, NCDC जैसे संस्थानों के माध्यम से वित्तपोषण के नए अवसरों पर चर्चा हुई है, जो बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए प्रासंगिक है। कार्यशाला में डेयरी क्षेत्र, जैविक उत्पादों और निर्यात को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जो ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र से संबंधित प्रश्नों के लिए उपयोगी होगा। इस प्रकार, यह आयोजन परीक्षाओं में सहकारी क्षेत्र, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रश्नों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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