✎ बीआरआईसीएस देश डॉलर के विकल्प पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन नई मुद्रा बनाने के बजाय भुगतान प्रणाली को सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: International Relations
ब्रिक्स देश डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के संदर्भ में लंबे समय से चर्चा कर रहे हैं, किंतु हालिया बैठकों में उनके वित्तीय ट्रैक के अधिकारियों ने सावधानी बरती है। नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट रूप से किसी ‘सामान्य ब्रिक्स मुद्रा’ अथवा अमेरिकी डॉलर के स्थानापन्न करने की बात नहीं की गई। इसके बजाय, इसमें अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणालियों, स्थानीय मुद्राओं में निपटान तथा सदस्य देशों द्वारा ‘राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान’ करते हुए स्वैच्छिक सहयोग पर जोर दिया गया। ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (बीपीटीएफ) द्वारा ‘तेज, कम लागत वाले तथा पारदर्शी’ सीमा-पार भुगतान तंत्र विकसित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए सदस्य देशों ने कहा कि इस दिशा में व्यावहारिक समाधानों पर आगे काम किया जाए। यह रुख ब्रिक्स के सदस्य देशों द्वारा समय-समय पर व्यक्त किए गए ‘डॉलर-विरोधी’ बयानों के मुकाबले अधिक संयमित दिखाई देता है।
ब्रिक्स देशों के बीच डॉलर-विरोधी भावना को लेकर सदस्य देशों के नेताओं के वक्तव्यों में अंतर स्पष्ट है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स को ‘अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सीमित मुद्राओं पर निर्भरता’ से मुक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ाने तथा मुद्रा जोखिम प्रबंधन के उपकरण तैयार करने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की भूमिका का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच डॉलर-रहित लेन-देन को सुविधाजनक बनाना है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘नए, सतत वैश्विक विकास मंच’ के निर्माण पर जोर दिया, जबकि ब्रिक्स देशों के संयुक्त बयान में एनडीबी को स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण बढ़ाने तथा विविध स्रोतों से संसाधन जुटाने के लिए प्र
स्रोत: orissapost.com
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