✎ आईसीएमआर द्वारा बीएचयू को मिले 15 करोड़ रुपये के अनुदान से जैव चिकित्सा अनुसंधान में क्रांतिकारी बदलाव संभव।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की विशेष अनुदान योजना के तहत उच्च प्रभाव वाले जैव चिकित्सा नवाचार के लिए छह प्रमुख शोध अनुदान प्राप्त हुए हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये के इस अनुदान से गॉलब्लैडर कैंसर का शीघ्र पता लगाने, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) के लिए अगली पीढ़ी के समाधान, पोस्ट-काला-अज़ार डर्मल लीशमैनियासिस निदान, बाल चिकित्सा सेप्टिक शॉक और रीनल सेल कार्सिनोमा के लिए सटीक ऑन्कोलॉजी जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर केंद्रित परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। इस सफलता से बीएचयू में अनुसंधान गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जहां पिछले छह महीनों में ही संकाय सदस्यों ने विभिन्न वित्तपोषण एजेंसियों को 200 से अधिक परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस उपलब्धि को चिकित्सा विज्ञान और सुलभ स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्टता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है।
यह उपलब्धि बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि यह सरकारी अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) अनुदानों, उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति जैसे विषयों से सीधे जुड़ी हुई है। आईसीएमआर जैसे शीर्ष अनुसंधान निकायों से मिलने वाले अनुदान देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रही पहलों को दर्शाते हैं, जो नीति निर्माण, वित्तीय आवंटन और सामाजिक कल्याण से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त, बीएचयू जैसी संस्थाओं द्वारा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने का प्रयास ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के अनुरूप है, जो वर्तमान में चल रहे सरकारी अभिय
स्रोत: Hindustan Times
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