✎ कवच 4.0 रेल सुरक्षा में स्वदेशी तकनीक का महत्वपूर्ण सुधार है, जो स्थान सटीकता, संचार और इंटरलॉकिंग में उन्नति लाता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security
भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद डिवीजन में मल्कजगिरी-कामारेड्डी सेक्शन के 108 किलोमीटर मार्ग पर ‘कवच 4.0’ प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है, जो रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रणाली में स्थान की सटीकता में वृद्धि, बड़े यार्डों में बेहतर सिग्नल जानकारी, स्टेशन-से-स्टेशन ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) इंटरफेस तथा सुरक्षा और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए डायरेक्ट इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग इंटरफेस जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। कवच 4.0 स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जिसे लोको पायलटों द्वारा ट्रेनों को निर्धारित गति सीमा के भीतर रखने तथा खतरे की स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली खराब मौसम में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है और इसे उच्चतम सुरक्षा प्रमाणन, सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4) के अनुरूप विकसित किया गया है।
यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका सीधा संबंध बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं से है। बैंकिंग क्षेत्र में, जहां तकनीकी नवाचार और डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, कवच 4.0 जैसी स्वदेशी तकनीकों का विकास देश की आर्थिक एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। एसएससी परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान एवं करेंट अफेयर्स के तहत इस प्रकार की राष्ट्रीय उपलब्धियों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में तकनीकी एवं बुनियादी ढांचागत विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस प्रकार, यह घटना न केवल रेल सुरक्षा बल्कि समग्र राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रासंगिक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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