✎ साइबर ठगी रोकने हेतु बैंकिंग प्रणाली में बायोमेट्रिक एवं चेहरा पहचान तकनीक का प्रयोग आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने साइबर ठगी की रकम को म्यूल खातों के माध्यम से निकाले जाने के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कोर्ट में प्रस्तुत मामले में बताया गया कि साइबर अपराधी पीड़ितों के खातों से धन निकालकर उसे म्यूल खातों तक पहुंचाते हैं, जहां से एटीएम के माध्यम से नकदी निकाली जाती है। इससे धन के प्रवाह का पता लगाना कठिन हो जाता है, क्योंकि मनी ट्रेल कमजोर पड़ जाती है और जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज जैसे सीमित साक्ष्य ही उपलब्ध होते हैं। हाईकोर्ट ने RBI को निर्देश दिया है कि बड़ी या संदिग्ध निकासी के दौरान बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, चेहरा पहचान तकनीक या अतिरिक्त प्रमाणीकरण प्रणाली लागू करने पर विचार किया जाए, ताकि धन निकासी के समय वास्तविक खाताधारक की पहचान सुनिश्चित की जा सके। इससे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और धन शोधन जैसी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी।
यह मामला बैंकिंग प्रणाली में साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकथाम के लिए RBI की नीतियों के महत्व को रेखांकित करता है, जो बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। परीक्षाओं में इस तरह के मामलों से संबंधित प्रश्नों में साइबर अपराधों के प्रकार, उनके प्रभाव, नियामक संस्थाओं की भूमिका और तकनीकी समाधानों जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों, जैसे कि धोखाधड़ी वाले लेन-देन की रिपोर्टिंग और ग्राहक सुरक्षा उपायों पर भी सवाल पूछे जा सकते हैं। इस मामले में हाईकोर्ट के सुझावों से स्पष्ट होता है कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना आवश्यक है, जो आर्थिक अपराधों को नियंत्रित करने में सहायक होगा।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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