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मध्य प्रदेश: 47 साल बाद भी नर्मदा का पूरा पानी नहीं ले पाया MP, अब 2031 तक हर बूंद के इस्तेमाल की योजना — labelled illustration

✎ मध्य प्रदेश सरकार 2031 तक नर्मदा के पूरे आवंटित जल (18.25 एमएएफ) का उपयोग सुनिश्चित करेगी।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

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मध्य प्रदेश को नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के फैसले के बाद 18.25 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) पानी आवंटित हुआ था, लेकिन अब तक केवल 10 एमएएफ पानी का ही उपयोग किया जा सका है। राज्य सरकार ने अब 2031 तक पूरे आवंटित पानी का उपयोग करने के लिए लगभग 40 परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, जिनकी कुल लागत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इन परियोजनाओं में अपर नर्मदा बहुउद्देशीय परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और माइक्रो सिंचाई योजनाएं शामिल हैं, जिनसे लगभग 31.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। सरकार का प्रयास है कि राज्य की कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

यह विषय बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें जल संसाधन प्रबंधन, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और राजकोषीय आवंटन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। परीक्षाओं में जल विवाद, बहुउद्देशीय परियोजनाओं और राज्यों के बीच जल बंटवारे जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी खर्च, बुनियादी ढांचे के विकास और कृषि क्षेत्र से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, जो वित्तीय संस्थानों और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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