✎ स्थानीय निकायों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने से भारतीय लोकतंत्र सशक्त होगा।
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राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष ने स्थानीय निकायों को अधिकार और अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने की मांग की है। तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के. अलाउद्दीन ने कहा कि यदि विकेंद्रीकरण को साकार किया जा सके, तो हम भारतीय लोकतंत्र के एक संवैधानिक वादे से आगे बढ़कर एक जीवंत वास्तविकता बन जाएंगे। उन्होंने चेन्नई में आयोजित ‘स्थानीय निकाय शासन और वित्त को मजबूत करना’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि किसी संस्था को सार्थक स्वायत्तता और अपने कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त एवं पूर्वानुमेय वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। स्थानीय सरकारें आज भी केंद्र और राज्य सरकारों से मिलने वाले हस्तांतरण पर काफी हद तक निर्भर हैं। नगरपालिका प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के सचिव गगनदीप सिंह बेदी ने बताया कि ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) जैसे संपत्ति कर, पेशेवर कर, किराये एवं शुल्क आदि के माध्यम से राज्य में केवल 1% से 8% तक ही होते हैं। जबकि ओईसीडी देशों में संपत्ति कर जीडीपी का लगभग 1.1% था, वहीं भारत में यह मात्र 0.2% ही है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने शहरों और गांवों को बेहतर विकास करना चाहते हैं, तो हमें और अधिक प्रयास करने होंगे, जैसे संपत्ति कर में वृद्धि करना। उन्होंने जीआईएस आधारित कर संग्रहण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोगकर्ता शुल्क, पार्किंग शुल्क आदि पर ध्यान केंद्रित करने की भी बात कही।
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के सचिव धर्मेंद्र प्रताप यादव ने तमिलनाडु ग्राम स्वराज, परिवर्तन एवं पुनरुत्थान पहल (टीएन-वेट्री) जैसी ग्रामीण सशक्तिकरण की पहलों का उल्लेख किया और ग्रामीण स्थानीय निकायों को कर लगाने एवं वसूलने के अधिकार देने पर बल दिया। उन्होंने नौकरशाही पर निर्भरता कम करने और स्वशासन मॉडल पर विश्वास व्यक्त किया। पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान एम. गोविंदा राव ने विकेंद्रीकरण संबंधी मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए
स्रोत: The Hindu
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