✎ न्यायिक भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**हिंदी नोट (प्राकृतिक परीक्षा शैली):**
लोकसभा में आज यशवंत वर्मा नकदी जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी। मार्च 2025 में उनके आवास के बाहर स्थित अतिथि गृह से बड़ी मात्रा में अनधिकृत आंशिक रूप से जल चुकी नकदी बरामद हुई थी, जिसके बाद न्यायिक भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। न्यायमूर्ति वर्मा ने धन के स्रोत से इनकार किया था, किंतु तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश द्वारा आदेशित आंतरिक जांच में उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा समर्थित प्रस्ताव के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा ने जांच के दौरान ही इस्तीफा दे दिया था, जिससे संसद द्वारा समिति की सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
यह मामला बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में, वित्तीय अनियमितताओं एवं पारदर्शिता संबंधी मुद्दे लगातार परीक्षा का विषय रहे हैं, विशेषकर आरबीआई द्वारा नियमित निरीक्षण एवं अनुपालन के संदर्भ में। एसएससी में, लोकसभा की कार्यवाही, संसदीय समितियों एवं न्यायिक जांच प्रक्रियाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे कि “न्यायाधीशों (जांच) अधिनियम, 1968” के प्रावधान। आरबीआई ग्रेड बी में, शासन व्यवस्था, नैतिकता एवं वित्तीय अपराधों के निपटारे संबंधी मुद्दे प्रमुख होते हैं, जो इस मामले में न्यायपालिका एवं कार्यपालिका के अंतर्संबंध को दर्शाते हैं।
स्रोत: Times of India
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